किशोर कुमार के किस्से (Stories of Kishore Kumar)

किशोर कुमार (आभास कु. गांगुली) और लता जी पहली बार कैसे मिले, इसकी एक कहानी पढ़ी-सुनी है। दोनों मलाड के बॉम्बे टाकीज़ में रिकॉर्डिंग के लिए जा रहे थे। अब लता जी उन्हें पहचानती न थी, पर जहाँ-जहाँ वो ट्रेन बदलती, किशोर कुमार भी बदलते जाते। लता जी को लगा कि कोई सरफिरा पीछे पड़ गया है। वो भागते-भागते स्टूडियो पहुँची, तो वहाँ भी पीछे आ गए। आखिर लोगों ने बताया कि ये अशोक बाबू के भाई हैं, और इनका नाम ही किशोर कुमार है जिनके साथ आपका गायन है।

किशोर दा लता जी से हमेशा अपनी फीस एक रुपया कम लेते, आदर स्वरूप। ऐसी एक रुपए की कहानी पं. रविशंकर और विलायत ख़ान की भी है, पर वो किसी और मसले पर है। वो फिर कभी। यहाँ बस किशोर जी का लता जी के लिए आदर था।

एक दफे लता जी लेट हो गयी, तो उनका हिस्सा भी किशोर दा ने गा दिया। वो गीत “आ के सीधी लगी दिल पे जैसे कटरिया” मशहूर भी रहा, जिसमें पुरूष-स्त्री की आवाज बदल-बदल कर किशोर दा ने मौज-मस्ती में गाया।

किशोर दा को बाद में ‘लता मंगेशकर सम्मान’ मिला। और जब यह सम्मान मिला, उसके अगले साल सरकार ने ‘किशोर कुमार सम्मान’ की भी घोषणा कर दी। मरणोपरांत भी किशोर दा उनके पीछे चलते ही रहे।

क्या किशोर कुमार पर के.एल. सहगल का प्रभाव था? इस पर संदर्भ सुनाने से पहले ये पूछता हूँ कि किशोर दा पर किस का प्रभाव नहीं था? वो तो मजाक-मजाक में अपने भ्राता अशोक कुमार की भी खूबसूरत नकल उतारते। बिना किसी संगीत प्रशिक्षण के वो किसी महान् गायक की कॉपी कर लेते। गायक तो छोड़िए, जरूरत पड़ने पर एक बार लता जी के बदले भी गा दिया!

अब सहगल वाली बात पर आता हूँ। एक दफे सचिन देव बर्मन किशोर दा के घर पहुँचे तो वह बाथरूम में थे और नहाते हुए के.एल. सहगल की कॉपी करते बीच में योडल कर रहे थे। जब वो बाहर निकले तो एस.डी. बर्मन ने कहा कि किशोर! तुम ये नकल छोड़ दो, गला तोड़ दो, फिर निकलेगी किशोर कुमार की आवाज!

“कहना है, कहना हैss आज तुम से ये पहली बार। तुम ही तो लाई हो जीवन में मेरे प्यार, प्यार, प्यार।”

फ्लाइट की तैयारी में यही गीत सुनने लगा और मिथिला पहुँच गया। किशोर कुमार ने ही पहुँचाया। वो जब पकड़े जाते हैं, तो ‘अनुराधा अनुराधा…’ कहकर चिल्लाते हैं। क्यों?

किशोर कुमार के कैरैक्टर का नाम इस फिल्म में विद्यापति है। अब आगे की कहानी का कोई पक्का स्रोत नहीं। पर, मैं जितना पता लगा सका, बताता हूँ।

1937 ई. में फिल्म आई थी ‘विद्यापति’ जिसमें पृथ्वीराज कपूर ने मिथिला नरेश शिव सिंह का किरदार निभाया था। उनकी पत्नी कवि विद्यापति से आकर्षित होती है। विद्यापति के कई गीत काफी कामुक हैं, जो अवश्य किसी प्रेमिका से जुड़े होंगें, पर मेरे पास साक्ष्य नहीं। इस फिल्म में उनका रानी से प्रेम दिखाया गया है। अब रानी गई विद्यापति के पास, तो राजा विद्यापति की संगिनी अनुराधा से जुड़ जाते हैं। यह क्रॉस-कनेक्शन है।

विद्यापति रानी के साथ, राजा विद्यापति की संगिनी (गर्लफ्रेंड) के साथ। और वही थी विद्यापति की अनुराधा। यह फिल्म उस समय एक विद्रोही और विवादित फिल्म भी कही गई, जो समाज पर कुप्रभाव डाल सकती थी। खैर।

एक और कनेक्शन यह है कि इस फिल्म में मन्ना डे के चाचा जी के.सी. डे अनुराधा को ढूँढते आते हैं और गीत गाते हैं “गोकुल से गए गिरधारी”। यही के. सी. डे सचिन देव बर्मन के गुरु थे। अब पड़ोसन में संगीत दिया आर.डी. बर्मन ने और मन्ना डे ने भी गायकी की, तो ट्रिब्यूट देना बनता है।

फिल्मों में कुछ भी यूँ ही नहीं होता। हर चीज की वजह होती है। विद्यापति की अनुराधा भी मुझे ‘फिल्मी फिक्शन’ में मिल ही गई। सच में ऐसी कोई अनुराधा थी या नहीं, ये नहीं पता। पर राजा शिव सिंह के समय विद्यापति तो थे।

#ragajourney

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